साधना परमार्थिक संस्थान समिति, मण्डलेश्वर

साधना परमार्थिक संस्थान समिति, मण्डलेश्वर के बारे में

साधना परमार्थिक संस्थान समिति, मण्डलेश्वर (राष्ट्रीय राजा मानसिंह तोमर सम्मान वर्ष 2024 से सम्मानित)

साधना परमार्थिक संस्थान समिति सामाजिक, आध्यात्मिक तथा सांस्कृतिक तीनों क्षेत्रों में समप्रभुता के साथ कार्यरत सक्रिय संस्था है। समिति संगीत लिट्रसी विषय 'सुर चैतन्य' शीर्षक के अंतर्गत कार्य कर रही हैं, जिसमें शालेय विद्यार्थी, युवा तथा ग्रामीण स्त्री-पुरुषों को एक सरल सुगम मार्ग से संगीत से जोड़ना तथा भावनात्मक, मानसिक, बौद्धिक रूप से सुदृढ़ करने हेतु संकल्पित है। साधना परमार्थिक संस्थान आरंभ में सुर चैतन्य कला केन्द्र, मुम्बई के साथ संयुक्त रूप से कार्य रही थी, किन्तु वर्ष 2013 से संस्था स्वतंत्र रूप से कार्य कर रही हैं।
  • जैसा कि विदित है अखिल भारतीय गांधर्व महाविद्यालय मण्डल, मुम्बई की एक ऐसी संस्था है, जो शास्त्रीय संगीत पाठ्यक्रम तथा परीक्षा प्रणाली विगत 100 से अधिक वर्षों से संचालित करती है, इसी महाविद्यालय द्वारा मण्डलेश्वर में अखिल भारतीय संगीत शिक्षक-परीक्षक शिविर का आयोजन किया जाना तय हुआ, जहाँ पण्डित संतोष कोल्हटकर मुम्बई से आकर शास्त्रीय संगीत का प्रशिक्षण दिया करते थे। यह पण्डित कोल्हटकर जी का ही स्वप्न रहा कि शहरी व ग्रामीण बच्चों को एक साथ लाने से संस्कृति का आदान-प्रदान सरल एवं सुगम हो सकेगा। इसी भाव को समृद्ध एवं सफल करने के लिए साधना परमार्थिक संस्थान समिति की नींव एवं संकल्पना पण्डित संतोष कोल्हटकर ने की। किन्तु इसी बीच आपकी अस्वस्थता के कारण यह कार्य पूर्ण नहीं हो सका। किन्तु आपके स्वप्न को पूर्णता प्रदान की, पण्डित भालचन्द्र जोशी एवं आपनी पत्नि प्रेरणा कोल्हटकर, पुत्री-सुरभि कोल्हटकर एवं पुत्र गणपति कोल्हटकर ने, जिन्होंने इस संस्था के निर्माण के साथ ही इसके समन्वय, संयोजन एवं व्यवस्था का संपूर्ण कार्य दायित्व संभाला।

  • संस्था द्वारा इसके पश्चात् 3 दिवसीय वृहद् प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न विषय व संगीत स्तरों पर प्रतियोगिता आयोजित की गई। इस प्रतियोगिता में राज्य के सुदुर क्षेत्रों से 300 प्रतिभागी शामिल हुए, जिन्हें शास्त्रीय संगीत के महत्व एवं इसकी बारीकी से रूबरू कराया गया। संगीत प्रतियोगिता के दौरान यह परिलक्षित हुआ कि सुदुर गाँवों में बच्चों की आवाज बुलंद है, उनमें ललक है, उनके पास इस विषय पर मेहनत करने हेतु समय है तथा वे इस क्षेत्र में कुछ करना भी चाहते है, किन्तु उन्हें प्रशिक्षण की सुविधा उपलब्ध नहीं है। संस्था द्वारा गुरुकुल के माध्यम से निरन्तर इन बच्चों को प्रशिक्षण दिया जाता है तथा समय-समय पर मंचीय प्रस्तुति के माध्यम से इनकी कला को निखारा जाता है। साधना परमार्थिक संस्थान समिति ने इन बच्चों की ललक को देखते हुए एक स्थान पर 111 शालेय बच्चों को एकत्रित कर 20 मिनिट में एक छोटा ख्याल सिखाया गया, जिसे 21वें मिनिट में बच्चों ने सामूहिक रूप से गाकर गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया।

  • समिति द्वारा संगीत के वैज्ञानिक पक्ष की संकल्पना को लेकर एक अन्तरराष्ट्रीय सेमीनार आयोजित किया गया, जिसमें संगीत विषय पर शोधपत्र आमंत्रित किये गये। संगीत का भाषा से, संगीत का गणित से, संगीत का विज्ञान से, संगीत का वनस्पति से, संगीत का मानसिक रोगों से, संगीत का सकारात्मकता से कैसा व क्या संबंध है, इस पर अनेक शोधकर्ताओं ने पेपर प्रस्तुत किए। इस आयोजन में देवी अहिल्या विश्वविद्यालय एवं विज्ञान भारती सहयोगी संस्थान के रूप में जुड़े थे।

  • निमाड़ की लोक संस्कृति व कला का अनूठा संगम हमें संझा महोत्सव में देखने मिलता है, हम सभी विदित है कि आधुनिक काल में पक्के मकान तथा शिक्षा में संस्कृति के अभाव के कारण, गोबर में हाथ डालना बालिकाओं के लिए निकृष्ट कार्य होता जा रहा है, समिति संझा महोत्सव के माध्यम से भारतीय संस्कृति एवं इसकी उपयोगिता से प्रतिभागियों को रूबरू कराते हुए भारतीय संस्कृति से जोड़े जाने का महत्वपूर्ण प्रकल्प कर रही हैं। साधना परमार्थिक संस्थान समिति प्रतिवर्ष महिला दिवस के अवसर पर भी एक महत्वपूर्ण आयोजन करती है, जिसमें विभिन्न जनजागृति के आयोजन संस्था द्वारा किया जाता है।

  • मध्यप्रदेश शासन 'साधना परमार्थिक संस्थान समिति' को विगत तीन दशकों से भी अधिक समय से भारतीय संगीत के संरक्षण एवं संवर्धन के क्षेत्र में निरंतर सक्रियता, श्रेष्ठ कलानुशासन एवं उत्कृष्ट सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से अर्जित उपलब्धियों के लिए राष्ट्रीय राजा मानसिंह तोमर सम्मान वर्ष 2024 से सादर विभूषित करता है।